शुरुआत
खेती करने वाले हर किसान को पता है कि बीज, खाद, पानी और मज़दूरी का खर्च साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है। ऐसे में जब हर चार महीने में सरकार की तरफ से दो हज़ार रुपये सीधे खाते में आते हैं, तो यह राहत की बात होती है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना देश के करोड़ों किसानों के लिए एक भरोसेमंद सहारा बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 2026 में इस योजना में कुछ नए बदलाव हुए हैं? और क्या आपका नाम भी लाभार्थी सूची में है?
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि PM Kisan Yojana क्या है, किसे मिलता है यह पैसा, कैसे चेक करें अपना स्टेटस, और सबसे ज़रूरी – अगर अभी तक पैसा नहीं आया तो क्या करें। यह जानकारी उन किसान भाइयों के लिए है जो छोटी जोत पर खेती करते हैं और जिनके लिए यह छह हज़ार रुपये सालाना भी बहुत मायने रखते हैं।
योजना क्या है और इसका उद्देश्य
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत फरवरी 2019 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक मदद देना है ताकि वे खेती के लिए ज़रूरी सामान समय पर खरीद सकें। साल में तीन बार, हर चार महीने पर दो-दो हज़ार रुपये की किश्त किसानों के बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है।
इस योजना की खासियत यह है कि बीच में कोई दलाल या बिचौलिया नहीं होता। सरकार सीधे किसान के खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से पैसा भेजती है। इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होती है और किसान को पूरा पैसा मिलता है।
2026 के नए अपडेट में सरकार ने eKYC को और भी सख्त बना दिया है। जिन किसानों ने अभी तक अपना eKYC नहीं कराया है, उनकी किश्त रोक दी जा रही है। इसके अलावा, ज़मीन के रिकॉर्ड की भी गहराई से जाँच हो रही है ताकि सिर्फ असली किसानों को ही फायदा मिले।
योजना का असली मकसद यह है कि किसान साहूकारों के चक्कर में न फँसे और खेती के लिए ज़रूरी चीज़ें समय पर जुटा सकें। हालाँकि छह हज़ार रुपये बहुत बड़ी रकम नहीं है, लेकिन छोटे किसानों के लिए यह बीज खरीदने, खाद लेने या सिंचाई के खर्च में काम आती है।
योजना से किसे लाभ मिलेगा
यह योजना देश के सभी किसानों के लिए नहीं है। इसमें कुछ शर्तें हैं जिन्हें पूरा करना ज़रूरी है।
सबसे पहली बात, यह योजना उन किसानों के लिए है जिनके पास खेती योग्य ज़मीन है। आपके नाम पर या परिवार के किसी सदस्य के नाम पर खेती की ज़मीन होनी चाहिए। बटाई पर या किराए पर खेती करने वालों को इसका लाभ नहीं मिलता।
पहले यह योजना सिर्फ छोटे और सीमांत किसानों के लिए थी जिनके पास दो हेक्टेयर तक की ज़मीन थी, लेकिन बाद में इसे सभी किसानों के लिए खोल दिया गया। अब चाहे आपके पास एक बीघा हो या दस बीघा, आप आवेदन कर सकते हैं।
लेकिन कुछ लोगों को इस योजना से बाहर रखा गया है। जैसे कि अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है, तो आप योग्य नहीं हैं। इसी तरह, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे पेशेवर लोग भी इस योजना के दायरे में नहीं आते।
अगर कोई व्यक्ति आयकर भरता है या फिर पिछले साल में दस हज़ार रुपये से ज़्यादा का आयकर जमा किया है, तो वह भी इस योजना का लाभार्थी नहीं बन सकता। पूर्व या वर्तमान सांसद, विधायक, मंत्री भी इससे बाहर हैं।
किसान के परिवार में पति-पत्नी और नाबालिग बच्चे शामिल होते हैं। एक परिवार को एक ही बार लाभ मिलता है, भले ही ज़मीन किसी के भी नाम पर हो।
पात्रता (Eligibility)
पात्रता की शर्तें साफ़ और सीधी हैं। इन्हें अच्छे से समझना ज़रूरी है वरना आवेदन अटक सकता है।
सबसे पहली शर्त – आपके पास खेती योग्य ज़मीन होनी चाहिए और वह आपके नाम पर या परिवार के सदस्य के नाम पर रजिस्टर्ड होनी चाहिए। ज़मीन का खसरा-खतौनी होना ज़रूरी है।
दूसरी शर्त – आप भारत के नागरिक होने चाहिए। और आपकी उम्र अठारह साल से ज़्यादा होनी चाहिए।
तीसरी शर्त – आपका बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए। बिना आधार लिंक के अब कोई किश्त नहीं आती।
चौथी शर्त – आपने eKYC करा ली हो। यह ऑनलाइन या CSC Center पर जाकर कराया जा सकता है। बिना eKYC के अब किश्त रुक जाती है।
पाँचवीं शर्त – आप किसी सरकारी पद पर नहीं होने चाहिए और न ही कोई बड़ा व्यवसाय या पेशा करते हों।
छठी शर्त – अगर आपकी पेंशन दस हज़ार रुपये महीने से ज़्यादा है, तो भी आप पात्र नहीं हैं।
ध्यान रखें कि सरकार समय-समय पर पात्रता की जाँच करती है। अगर किसी को गलत तरीके से पैसा मिला हुआ पाया जाता है, तो उसे वापस करना पड़ता है और आगे की किश्तें भी रुक जाती हैं।
आवश्यक दस्तावेज़
योजना में रजिस्ट्रेशन या eKYC कराने के लिए कुछ ज़रूरी कागज़ात चाहिए होते हैं। इन्हें पहले से तैयार रखें।
आधार कार्ड – यह सबसे अहम दस्तावेज़ है। आपका आधार नंबर आपके मोबाइल से लिंक होना चाहिए ताकि OTP आ सके।
खसरा-खतौनी / ज़मीन के कागज़ात – यह साबित करने के लिए कि आपके पास खेती की ज़मीन है। इसमें आपका नाम, खसरा नंबर, रकबा (ज़मीन का क्षेत्रफल) साफ़-साफ़ लिखा होना चाहिए।
बैंक पासबुक – जिसमें आपका नाम, खाता नंबर, IFSC Code साफ़ दिख रहा हो। खाता किसी भी सरकारी या प्राइवेट बैंक में हो सकता है, लेकिन वह चालू होना चाहिए और आधार से लिंक होना चाहिए।
मोबाइल नंबर – जो आधार से लिंक हो। इसी पर सभी अपडेट आते हैं।
पासपोर्ट साइज़ फोटो – हाल की खींची हुई, साफ़ और स्पष्ट।
कुछ राज्यों में किसान का पहचान पत्र या किसान क्रेडिट कार्ड भी मदद कर सकता है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है।
अगर ज़मीन किसी और के नाम पर है लेकिन वह आपके परिवार का सदस्य है, तो आपको यह साबित करना होगा कि आप एक ही परिवार से हैं। इसके लिए राशन कार्ड या परिवार रजिस्टर की कॉपी काम आ सकती है।
आवेदन प्रक्रिया (Online / Offline)
अगर आप पहली बार इस योजना में रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं तो यह प्रक्रिया फॉलो करें।
ऑनलाइन आवेदन:
सबसे पहले PM Kisan की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएँ।
होम पेज पर Farmers Corner का सेक्शन मिलेगा। उसमें New Farmer Registration का विकल्प चुनें।
अब आपको अपना आधार नंबर डालना होगा और कैप्चा कोड भरना होगा। इसके बाद आपके आधार से लिंक मोबाइल पर OTP आएगा।
OTP डालने के बाद एक फॉर्म खुलेगा जिसमें आपको अपना नाम, पता, बैंक खाते की जानकारी, और ज़मीन का विवरण भरना होगा।
सभी दस्तावेज़ स्कैन करके अपलोड करें। फॉर्म को अच्छे से चेक करने के बाद Submit कर दें।
आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा। इसे संभालकर रखें।
ऑफलाइन आवेदन:
अगर आपको इंटरनेट की समझ नहीं है, तो अपने नज़दीकी CSC Center (Common Service Centre) या Jan Seva Kendra पर जाएँ।
वहाँ के ऑपरेटर को अपने सभी दस्तावेज़ दिखाएँ। वे आपका रजिस्ट्रेशन कर देंगे। इसके लिए वे कुछ शुल्क ले सकते हैं, जो आमतौर पर तीस से पचास रुपये तक होता है।
आप अपने गाँव के लेखपाल या पटवारी के पास भी जा सकते हैं। कई राज्यों में वे भी रजिस्ट्रेशन में मदद करते हैं।
रजिस्ट्रेशन के बाद आपका नाम जाँच के लिए भेजा जाता है। अधिकारी आपकी ज़मीन के कागज़ात और अन्य जानकारी की पुष्टि करते हैं। अगर सब कुछ सही पाया जाता है, तो आपका नाम लाभार्थी सूची में जुड़ जाता है और अगली किश्त में पैसा आने लगता है।
eKYC कैसे करें:
अगर आप पहले से रजिस्टर्ड हैं लेकिन eKYC नहीं कराई है, तो:
pmkisan.gov.in पर जाएँ और eKYC का विकल्प चुनें। अपना आधार नंबर डालें और OTP से वेरीफाई करें। इतना करने से आपकी eKYC हो जाएगी।
किश्त कब और कैसे आती है
PM Kisan के तहत साल में तीन किश्तें आती हैं:
पहली किश्त: अप्रैल से जुलाई (दो हज़ार रुपये)
दूसरी किश्त: अगस्त से नवंबर (दो हज़ार रुपये)
तीसरी किश्त: दिसंबर से मार्च (दो हज़ार रुपये)
यानी हर चार महीने में एक किश्त आती है। पैसा सीधे आपके बैंक खाते में DBT के माध्यम से ट्रांसफर होता है।
सरकार किश्त भेजने से पहले लाभार्थी सूची तैयार करती है। जिनका नाम सूची में होता है, उन्हें किश्त मिलती है। अगर किसी कारण से आपका नाम सूची में नहीं है, तो किश्त नहीं आएगी।
किश्त आने में कभी-कभी दो-तीन दिन की देरी हो सकती है क्योंकि बैंकों को लाखों ट्रांजेक्शन प्रोसेस करने होते हैं।
अपना स्टेटस कैसे चेक करें
यह जानना बेहद ज़रूरी है कि आपका पैसा आया या नहीं, और अगर नहीं आया तो क्यों।
ऑनलाइन स्टेटस चेक करने का तरीका:
pmkisan.gov.in पर जाएँ।
Farmers Corner में Beneficiary Status का विकल्प चुनें।
अब आपके पास तीन तरीके हैं स्टेटस चेक करने के:
- आधार नंबर से
- अकाउंट नंबर से
- मोबाइल नंबर से
कोई भी एक तरीका चुनें, जानकारी भरें और Get Data पर क्लिक करें।
स्क्रीन पर आपको दिखेगा कि आपको कितनी किश्तें मिल चुकी हैं, कौन सी तारीख को मिली थीं, और अगली किश्त कब आने वाली है।
अगर किसी किश्त के सामने FTO is generated and Payment confirmation is pending लिखा है, इसका मतलब है पैसा आने की प्रक्रिया चल रही है।
अगर किसी किश्त के आगे लाल निशान या Rejected लिखा है, तो आपको कारण पता करना होगा।
किश्त नहीं आई तो क्या करें
कई बार ऐसा होता है कि किश्त नहीं आती। इसके कई कारण हो सकते हैं:
eKYC नहीं हुई है: सबसे आम कारण यही है। जल्दी से eKYC करा लें।
आधार और बैंक खाता लिंक नहीं है: अपने बैंक जाकर आधार लिंकिंग करा लें।
ज़मीन के कागज़ात में गड़बड़ी: हो सकता है आपके ज़मीन के रिकॉर्ड में कुछ दिक्कत हो। पटवारी से मिलकर इसे ठीक कराएँ।
डुप्लीकेट एंट्री: कभी-कभी एक ही किसान का नाम दो बार रजिस्टर हो जाता है, जिससे सिस्टम कन्फ्यूज हो जाता है।
बैंक खाता बंद या निष्क्रिय: अगर आपका खाता लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है, तो बैंक उसे बंद कर देता है। नया खाता खुलवाकर योजना में अपडेट कराएँ।
समाधान:
सबसे पहले PM Kisan Helpline पर कॉल करें: 155261 या 011-24300606
अपने ज़िले के कृषि विभाग के दफ़्तर जाएँ और अपनी समस्या बताएँ।
अगर वहाँ भी समाधान नहीं हुआ, तो pmkisan.gov.in पर Grievance सेक्शन में जाकर शिकायत दर्ज कराएँ।
योजना के लाभ और सीमाएँ
लाभ:
सबसे बड़ा फायदा यह है कि पैसा सीधे किसान के खाते में आता है। बीच में कोई कमीशनखोरी नहीं होती।
किसान को खेती के लिए साहूकार से कर्ज़ लेने की ज़रूरत कम हो जाती है। छह हज़ार रुपये से बीज, खाद या कीटनाशक खरीद सकते हैं।
यह पैसा हर साल मिलता रहता है, इसलिए किसान उस पर भरोसा कर सकता है।
प्रक्रिया अब बहुत आसान हो गई है। घर बैठे मोबाइल से स्टेटस चेक कर सकते हैं।
सीमाएँ:
छह हज़ार रुपये सालाना बहुत बड़ी रकम नहीं है। खेती का असली खर्च इससे कहीं ज़्यादा होता है।
eKYC और तकनीकी प्रक्रिया में कई बुज़ुर्ग किसानों को दिक्कत आती है।
कभी-कभी ज़मीन के रिकॉर्ड में छोटी सी गलती की वजह से किश्त अटक जाती है और उसे ठीक करने में महीनों लग जाते हैं।
जो किसान बटाई पर खेती करते हैं या जिनके नाम पर ज़मीन नहीं है, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या किराए की ज़मीन पर खेती करने वालों को भी पैसा मिलेगा?
नहीं। यह योजना सिर्फ उन्हीं किसानों के लिए है जिनके नाम पर या उनके परिवार के सदस्य के नाम पर ज़मीन रजिस्टर्ड है।
अगर पति-पत्नी दोनों के नाम पर अलग-अलग ज़मीन है तो क्या दोनों को पैसा मिलेगा?
नहीं। योजना के नियम के अनुसार एक परिवार को एक ही बार लाभ मिलता है। परिवार में पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे शामिल होते हैं।
eKYC कितनी बार करानी पड़ती है?
eKYC एक बार ही करानी होती है। लेकिन अगर आपका आधार या मोबाइल नंबर बदल जाता है, तो दोबारा अपडेट कराना पड़ सकता है।
क्या किसी और के बैंक खाते में भी पैसा आ सकता है?
नहीं। पैसा सिर्फ उसी के खाते में आएगा जिसके नाम पर रजिस्ट्रेशन है और जिसका आधार उस खाते से लिंक है।
अगर गलती से किसी को ज़्यादा पैसा मिल गया तो क्या होगा?
सरकार समय-समय पर ऑडिट करती है। अगर किसी को गलत तरीके से या ज़्यादा पैसा मिला हुआ पाया जाता है, तो उसे वापस करना पड़ता है और आगे की किश्तें रोक दी जाती हैं।
क्या इस योजना में कोई शुल्क लगता है?
रजिस्ट्रेशन बिल्कुल मुफ्त है। अगर आप CSC Center पर जाते हैं तो वे सेवा शुल्क के तौर पर तीस-चालीस रुपये ले सकते हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई शुल्क नहीं है।
अंतिम निष्कर्ष और ईमानदार राय
PM Kisan Yojana किसानों के लिए एक अच्छी पहल है, खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए जिनके पास आमदनी के सीमित साधन हैं। छह हज़ार रुपये भले ही बहुत बड़ी रकम न लगे, लेकिन यह एक भरोसा देती है कि सरकार किसानों के बारे में सोच रही है।
लेकिन ईमानदारी से कहें तो खेती का असली खर्च इससे कहीं ज़्यादा है। बीज, खाद, कीटनाशक, मज़दूरी, बिजली, पानी – सबका खर्च मिलाएँ तो छह हज़ार रुपये बहुत कम पड़ जाते हैं। फिर भी, कुछ न होने से यह बेहतर है।
अगर आप योग्य किसान हैं और अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, तो जल्द से जल्द करा लें। और अगर रजिस्टर्ड हैं लेकिन eKYC नहीं हुई है, तो बिना देर किए करा लें वरना आपकी किश्त रुक जाएगी।
सबसे ज़रूरी बात – किसी बिचौलिए या दलाल के झाँसे में न आएँ। यह योजना पूरी तरह मुफ्त है। अगर कोई पैसे मांगे तो तुरंत शिकायत करें।
अपने कागज़ात हमेशा सँभालकर रखें, समय-समय पर अपना स्टेटस चेक करते रहें, और अगर कोई दिक्कत आए तो हेल्पलाइन पर संपर्क करें। यह आपका हक़ है, इसे ज़रूर लें।